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मध्यम मध्यम : एक :

*एक* ध्वनि समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त है. ये ध्वनियाँ अलग-अलग हैं फिर भी मिलजुल कर आकाशगंगा में विचरण करती हैं. कुछ ध्वनियों को हम सुन सकते हैं, समझ सकते हैं लेकिन कुछ ऐसी भी हैं जो हम तक नहीं पहुँच पाती इसलिए वे हमारे लिये अन्जानी हैं. इस ब्रह्माण्ड के सबसे बुद्धिमान प्राणी मनुष्य की जीवनगाथा भी इन्हीं ध्वनियों की तरह है, जिसके कुछ अंश दिखाई पड़ते हैं, समझ आते हैं लेकिन उसके जीवन का अधिकतम हिस्से न दिखाई पड़ते है, न समझ आते हैं. समझ आयेगा भी कैसे? समझ के लिये खुला दिमाग चाहिए, समझने की शक्ति चाहिए और सामनेवाले के मन की बात का विश्लेषण करने की क्षमता.  विद्याशंकर की ही बात करें, अपने विद्याशंकर मिसिर की, तो चार बच्चों के इस पिता ने एक लड़के की आस में तीन लड़कियां पैदा कर ली. लड़का धीरे-धीरे बढ़ रहा था जबकि लड़कियां फटाफट. ग्यारह साल के वैवाहिक जीवन में चार बच्चों को जन्म देने में मिसराइन की आंखें धंस गयी हैं, शरीर निचुड़ गया और दिमाग अस्थिर हो गया है. बात-बात में चिड़चिड़ाना, घर में तूफ़ान उठा लेना और नाराज़गी का भूत लड़कियों को डांट कर उतारना उनकी नियमित दिनचर्या है. मिसिर और मि...