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मध्यम मध्यम : चार

*चार* प्रत्येक परिवार के सामने हर समय कोई-न-कोई चुनौती रहती है, सामान्यतया अस्तित्व और सम्मान का संकट. वैसे तो सारा खेल मनोविज्ञान का है लेकिन शतरंज की चाल की तरह उलझा हुआ है. सामने वाला खिलाड़ी समय है जिसकी चाल समझ नहीं आती क्योंकि वह खेल के नियम को नहीं मानता जबकि हम अपनी चाल खेल के नियम के अनुसार चलते हैं. यहीं गड़बड़ हो जाती है, वह बाज़ी जीतते जाता है और हम उसका विजयी विद्रूप चेहरा देखते रह जाते हैं. रज्जो समर्पित गृहिणी है. उसने अपनी इच्छाओं को आलमारी में रखे कपड़ों की तह में दबाकर रख छोड़ा है. साफ़-सफाई के दौरान यदा-कदा वे यादें उभर कर सामने आ जाती हैं तब दो आंसू टपक पड़ते हैं, बस हो गया. जब से रज्जो ससुराल आयी है, सिर्फ ससुराल की होकर रह गयी. वैसे तो इलाहाबाद और जबलपुर दोनों नदियों के किनारे बसे हैं लेकिन उनमें बहुत फर्क है. गंगा का पाट बहुत चौड़ा है, वैसे ही वहां के लोगों का दिल भी चौड़े हैं जबकि नर्मदा का पाट औसतन छोटा है उसका असर जबलपुर में रहने वालों पर भी है. औरतों के लिए घर के बाहर की दुनिया भी घर के अन्दर की दुनिया जैसी संकुचित है. दुनिया केवल उनके लिए अवश्य खुल गयी है जो संप...