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लिखने का सबब

लिखने का सबब ------------------- इस कहानी का लेखक अपने जीवन के सत्तर वर्ष जी चुका. मेरे हम-उम्र देखते-देखते बच्चे से बूढ़े हो गये , अब जबरिया वापसी के लिए तत्पर हैं. कुछ तो पहले ही निकल लिए लेकिन मेरे जैसे कुछ अभी भी बचे हुए हैं जो अपने अतीत की यादों को दिल में संजोए हुए कभी आंसू बहा लेते हैं  तो  कभी मुस्कुरा लेते है. इस धरती से विदा लेते समय अब सब कुछ दिमाग में उसी तरह घूम रहा है जैसे कल की ही बात हो. फिलिम चल रही है और हम बैठे-बैठे देख रहे हैं. इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमा हाल में नहीं जाना पड़ता , टिकट नहीं कटानी पड़ती. इस फिल्म को न देखना चाहो तो भी देखनी पड़ती है क्योंकि ' पिक्चर ' लगातार चालू है , क्या करें , रुकती नहीं है. यहाँ सवाल यह है कि इस कहानी को वह क्यों पढ़े जो इस कहानी का पात्र है नहीं ? इस संसार में आए हर मनुष्य की कोई-न-कोई कहानी है. धरती से प्रगट होने से लेकर धरती में वापस प्रविष्ट हो जाने तक की यात्रा विकट है. इस ' बिन मांगे ' शरीर और प्राण को बचाए रखने के लिए मनुष्य को जीवन भर जुगत पर जुगत बैठानी पड़ती है. विपरीत परिस्थितियों को अपने अनु...