मध्यम मध्यम : आठ :
*आठ* मध्यमवर्गीय परिवार बेहोशी में जीते हैं. बेहोशी शब्द का प्रयोग इसलिए किया कि ऐसे परिवारों की कोई पूर्व योजना नहीं होती. इन्हें भगवान और सरकार की व्यवस्था पर अकूत भरोसा होता है. हर ख़ुशी में भगवान को ख़ुशी-ख़ुशी प्रसाद चढ़ा देते हैं और यदि कोई दुःख आया तो उसके सामने बैठकर आंसू बहा लेते है. सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह मंहगाई दूर कर देगी, शिक्षा और स्वस्थ्य का मुफीद इंतजाम करेगी, अदालतों में न्याय फटाफट मिलने लगेगा, पुलिस सज्जनता की प्रतिमूर्ति बन जाएगी, सरकारी दफ्तरों में रिश्वत बंद हो जाएगी, रेल समय पर चलेगी, वह सुबह कभी-न-कभी तो आएगी ! ये सपने हैं, मधुर सपने, जो नींद खुलते ही टूट जाते हैं लेकिन अगली रात को जब सोते हैं और वही सपने देखते हैं और फिर से खुश हो लेते हैं. वे ये भी सोचते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ने-लिखने में तेज निकलेंगे, अच्छी नौकरी में लग जाएंगे या बड़ा व्यापार करेंगे, या इंडस्ट्री लगाएंगे और ढेर सारा पैसा कमा कर लाएंगे. ये सब दिमाग में चलता है लेकिन कार्यरूप में परिणित नहीं होता, होनी को ग्रहण लग जाता है क्योंकि सारे प्रयास सार्थक योजना और पर्याप्त अर्थ के अभाव में भ...